मेरी व्यथा - The Sorrowful of My Life
मेरी व्यथा - देखो मैंने कितनी बार बोला है कि मुझे कोई भी बात नही सुननी हैं तुम्हारी, जैसे ही ता हूँ चालू हो जाती हो | और इतना कह कर के शिव बाहर चला गया अनु सोचने लगी कि मैंने ऐसा क्या कह दिया जो इतने नाराज हो गए अनु की शादी को आज चार वर्ष होने जा रहे है | पिता के सानिद्य में रहने वाली अनु को पता ही नहीं चला की कब उसके शादी तय कर दी गए बस घर वालो ने इतना बताया की लड़का इंजीनियर है और अपने बिज़नेस सेटअप करने वाला है | चलो सही है कम से कम बाहर घूमने का मौका तो मिलेगा जो की हर लड़की की तम्मना होती है की पिता जी ने तो अकेले की वजह से कही जाने नहीं दिया तो कम से कम पति के साथ तो घूम सकुंगी बुजुर्ग लोग कहते है की ये सब अपने नसीब पर होता है और जो लिखा होता है वो कभी नहीं मिटता | शादी के बाद भी मुझे आज तक घर से बहार जाने का मौका नहीं मिला तो ये सब या तो मेरे नशीब का ही खेल होगा जो हो रहा है | लेकिन में ये भी जानती हूँ की एक पत्नी का कर्त्तव्य होता है की पति के सुख और दुःख में साथ देना हाँ में जानती हूँ की मेरे पति खुद ...