मेरी व्यथा - The Sorrowful of My Life

मेरी व्यथा - देखो मैंने कितनी बार बोला है कि मुझे कोई भी बात नही सुननी हैं तुम्हारी, जैसे ही ता हूँ चालू हो जाती हो | और इतना कह कर के शिव बाहर चला गया अनु सोचने लगी कि मैंने ऐसा क्या कह   दिया जो इतने नाराज हो गए अनु की शादी को आज चार वर्ष होने जा रहे है | पिता के सानिद्य में रहने वाली अनु को पता ही नहीं चला की कब उसके शादी तय कर दी गए बस घर वालो ने इतना बताया की लड़का इंजीनियर है और अपने बिज़नेस सेटअप करने वाला है | चलो सही  है कम से कम बाहर घूमने का मौका तो मिलेगा जो की हर लड़की की तम्मना होती है की पिता जी ने तो अकेले की वजह से कही जाने नहीं दिया तो कम से कम पति के साथ तो घूम सकुंगी बुजुर्ग लोग कहते है की ये सब अपने नसीब पर होता है और जो लिखा  होता है वो कभी नहीं मिटता  | 


शादी के बाद भी मुझे आज तक घर से बहार जाने का मौका नहीं मिला तो ये सब या तो मेरे नशीब का ही खेल होगा जो हो रहा है | लेकिन में ये भी जानती हूँ की एक पत्नी का कर्त्तव्य होता है की पति के सुख और दुःख में साथ देना हाँ  में जानती हूँ  की मेरे पति खुद चाहते है मुझे अपने साथ रखना लेकिन अभी अपने काम की वजह  से नहीं हो पा रहा है मगर में अपने दिल की बात कहने के लिए तो सामर्थ रखती हूँ और उन्हें सुनना भी चाहिए पर पता नहीं क्यू नहीं सुनना चाहते है | इसी तरह रूठकर चले जाते है | में इतना जरूर जानती हूँ कि वो हमेशा मेरे लिए सोचते है और अच्छा सोचते है मगर उन्हें अपनी किस्मत से लड़ना नहीं आता है मेरे खुद के जो सपने थे मैंने उन्हें उसे दिन छोर दिया था जिस दिन मैंने अपने पिता का घर छोर दिया था और मेरा अब खुद का कोई सपना नहीं है सब मेरे पति के सपनो में शामिल है और में आपको ये अहसास दिलाती हूँ में आपको कभी  परेशान नहीं करुँगी मगर में अपनी इस ब्यथा को किस से कहूं | जानती हूँ आप हर चीज़ का ख्याल रखते हो मेरा मगर घर की कुछ समस्या ऐसे है जो की आपके जाने के बाद आपने  आप उजागर हो जाती है में उन्हें कैसे झेलू अगर में झेल भी रही हूँ मगर आपसे बताने के बाद मेरा मन हल्का हो जाये ऐसी कोशिश करती हूँ | मगर आपको  सायद ये भी सही नहीं लगता है |  

जब तक हूँ, जिन्दा ज़िंदगी तुम्हारी रहेगी 
मेरे दिल में, सदा तुम्हारी ही, मुहब्बत रहेगी 
मेरे जिंदिगी का हर पल खुशनुमा है, आपसे  
साथ फेरौ की कसमो की तरह, साथ जन्मो तक साथ रहूंगी 

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