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अंतिम पत्र - The Last Latter

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आज पत्र क्यों नहीं मिला? क्या हो गया उसे? कहीं कोई परेशानी तो नहीं? मन में अनेक तरह के ख्याल आ रहे थे। सोचते-सोचते घर पहुंचा और वही ख्याल मन में उमड़ने लगे कि आखिर हुआ क्या होगा। गीता और अर्जुन की वह जगह, जहां वे अपने-अपने पत्र रख देते थे, याद आई। गांव का माहौल ही ऐसा होता है जहां हर कदम संभलकर रखना पड़ता है। अगर प्रेमिका रास्ते में मिल भी जाए तो देखना मुश्किल है, क्योंकि गांव में ना जाने कब कौन सी बात बन जाए। इसलिए बहुत ही समझदारी से रहना पड़ता है। गीता और अर्जुन का मेल भी कुछ अलग ही था। दोनों की अच्छी जमती थी, लेकिन उन्होंने कभी किसी को यह जानने नहीं दिया कि उनके बीच कुछ है। पत्रों के आदान-प्रदान से ही बातें होती थीं। इसके अलावा उनके पास कोई और साधन नहीं था। प्यार एक ऐसा शब्द है, जो लगता है कि इसके जैसा कोई और शब्द दुनिया में होगा ही नहीं। शायद ही दूसरा कोई शब्द बनाया गया हो ऐसा। इसमें ही सारे शब्द समाहित हैं, इसमें ही दुनिया समाहित है। इस शब्द में इतनी खुशी है कि किसी और शब्द में नहीं होगी। इसमें इतना दुख है कि शायद ही कहीं हो। यह इतना कीमती है कि सच्चा प्रेमी अपनी जान देकर भी खुश र...